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अध्याय 12 का श्लोक 6 Part 1
अध्याय 12 का श्लोक 6 Part 2
सम्प्रति स्वाध्यायं परिहारन्—
भारतवर्षस्य स्थिति
महाकवि भारविप्रणीत किरातार्जुनीयम् विश्लेषणम् (UG MJC Sem VI)
कादम्बरी – शुकसोपदेशः. (UG MJC Sem VI)
कृत्यप्रकरण के व्याख्यात सूत्र (UG MJC Sem VI)
तथापि प्रियाह रजि कर्तृनिःश्रितेन युक्तेत्याहुस्तत् व्याख्यानं न ह्यतः—
तौयारयेणाह— (UG MJC Sem VI)
उत्तमा’ ‘मालती’ व्याख्योपेतः
अध्याय 12 का श्लोक 1 (अर्जुन उवाच)
॥ श्रीः ॥
महाकविकालिदासप्रणीतम्
मेघदूतम्
॥ श्रीः ॥
कादम्बरी–शुकनासोपदेशः
संज्ञावाचक शब्द
पञ्चतन्त्रम्
श्रीमद भगवद गीता
रघुवंशम् प्रथम सर्ग
अथर्ववेद की विषयवस्तु
शिवराजविजय